Story 6 दोस्ती Friendship Part 2 : मीना का मुश्किल दिन - Mina's difficult day


 

दोस्ती : भाग 2 — मीना का मुश्किल दिन

अगले दिन शाम को, किराने की दुकान के बाहर वही तीनों औरतें फिर मिलीं— मीना, फ़रज़ाना और लता।

लेकिन आज मीना कुछ थकी‑सी लग रही थी। उसके बाल बिखरे थे, और हाथ में लंबी‑सी लिस्ट थी।

फ़रज़ाना ने तुरंत पूछा, “अरे मीना, सब ठीक है? आज बहुत परेशान लग रही हो।”

मीना ने हल्की‑सी मुस्कान दी, “ठीक हूँ… बस दिन थोड़ा मुश्किल था।”

लता ने धीरे से कहा, “बताओ न, क्या हुआ?”

मीना ने गहरी साँस ली और बोली, “सुबह से ही सब उल्टा हो रहा है। बच्चे स्कूल के लिए देर से उठे, दूध उबलकर गिर गया, गैस खत्म हो गई, और ऊपर से घर की सफ़ाई भी करनी थी। फिर पति ने फोन करके कहा कि आज देर से आएँगे… तो बस, पूरा दिन भागदौड़ में निकल गया।”

फ़रज़ाना ने हँसते हुए कहा, “ये तो हर घर की कहानी है। हम सब रोज़ ऐसे ही मैराथन दौड़ते हैं।”

तीनों हँस पड़ीं, और मीना का चेहरा थोड़ा हल्का हो गया।

छोटी‑सी मदद

लता ने मीना की लिस्ट देखी और बोली, “इतनी सारी चीज़ें? अकेले कैसे उठाओगी?”

मीना बोली, “क्या करूँ, हफ़्ते भर का सामान है। बच्चों को कल टिफ़िन में परांठे चाहिए, और घर में आटा भी खत्म है।”

फ़रज़ाना ने तुरंत कहा, “चलो, हम दोनों मदद कर देते हैं। तुम सामान चुनो, हम टोकरी पकड़ते हैं।”

मीना ने थोड़ा संकोच किया, “अरे नहीं, मैं कर लूँगी…”

लता ने मुस्कुराकर कहा, “दोस्तों का काम ही क्या है? पहले दिन चाय पी ली, आज मदद कर लेते हैं।”

मीना हँस दी, “ठीक है, चलो।”

तीनों दुकान के अंदर गईं। कभी फ़रज़ाना दाल उठाती, कभी लता तेल का डिब्बा पकड़ती, कभी मीना पूछती, “ये वाला अच्छा है या वो वाला?”

दुकानदार भी मुस्कुरा रहा था। उसे लगा जैसे तीन बहनें खरीदारी कर रही हों।

दुकान के बाहर

सारा सामान खरीदकर तीनों बाहर आईं। मीना ने कहा, “आज अगर तुम दोनों नहीं होतीं, तो मैं सच में रो पड़ती।”

फ़रज़ाना बोली, “अरे, रोने की क्या बात है। हम सबके ऐसे दिन आते हैं।”

लता ने धीरे से कहा, “और अब तुम अकेली नहीं हो। हम हैं न।”

मीना के चेहरे पर मुस्कान थी।

एक नई शुरुआत

चाय वाला पास ही खड़ा था। मीना ने कहा, “आज चाय मेरी तरफ़ से।”

फ़रज़ाना बोली, “अरे वाह, मुश्किल दिन का अच्छा अंत।”

लता ने कप उठाते हुए कहा, “और अच्छी दोस्ती की शुरुआत।”

तीनों ने चाय पी, हल्की हवा चली, और मीना का मुश्किल दिन धीरे‑धीरे आसान बन गया।

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