Story 4: मेहता मिक्स‑अप - Mehta Mix Up - Short Hindi story



कहानी: मेहता मिक्स‑अप

सुबह‑सुबह डॉक्टर के छोटे‑से क्लिनिक में हमेशा की तरह भीड़ लगी थी। रवि को बस अपनी दवाई के बारे में एक छोटा‑सा सवाल पूछना था — दो मिनट का काम — लेकिन लाइन देखकर उसे लगा कि आज ऑफिस पहुँचना मुश्किल है।

सिक डे लेने के लिए उसने फ़ोन उठाई, लेकिन तभी क्लिनिक में दो लोग ज़ोर‑ज़ोर से बातें करने लगे।

भीड़ में दो पड़ोसी बैठे थे — मिस्टर मेहता और मिस्टर मेहता। नाम एक, स्वभाव एक, और आदत — हर बात पर लड़ना।

आज की लड़ाई थी: कौन ज़्यादा बीमार है, और किसकी बारी पहले आनी चाहिए।

एक बोले, “मैं कल से दर्द में हूँ!” दूसरे बोले, “और मैं तीन दिन से!”

तभी रिसेप्शनिस्ट ने आवाज़ लगाई — “मिस्टर मेहता!”

बस… इतना सुनना था कि दोनों मेहता एक साथ उछल पड़े। दोनों ने सोचा कि बुलावा उन्हीं के लिए है। दोनों डॉक्टर के कमरे की तरफ़ दौड़े — और दरवाज़े पर जाकर धड़ाम! एक‑दूसरे से टकरा गए।

उनकी फाइलें हवा में उड़कर ज़मीन पर बिखर गईं। कागज़ इधर‑उधर, दोनों उधर‑इधर — और क्लिनिक में बैठे लोग हँसी रोक नहीं पा रहे थे।

शोर सुनकर डॉक्टर खुद बाहर आ गए। उन्होंने दोनों मेहताओं को ज़मीन पर कागज़ समेटते देखा और सिर हिलाया।

फिर उनकी नज़र रवि पर पड़ी। “अरे रवि! तुम तो कल ही आए थे।”

रवि ने तुरंत मौका पकड़ा। “हाँ डॉक्टर, बस दवाई के बारे में एक छोटा‑सा सवाल था… दो मिनट में हो जाएगा।”

डॉक्टर बोले, “ठीक है, तुम अंदर आ जाओ।”

दोनों मेहता अभी भी झुके हुए थे — “ये मेरा पेपर है!” “नहीं, ये मेरा है!” और बहस जारी थी।

रवि अंदर जाते हुए मन‑ही‑मन मुस्कुराया, “वाह… आज तो मैं समय पर ऑफिस पहुँच जाऊँगा। सिक डे बच गया। सिक डे बन गया लकी डे

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